केंद्र सरकार छोटे-मोटे अपराधों को अपराध-मुक्त करने वाला यानी सजा के दायरे से बाहर रखने वाला जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2025 सोमवार को लोकसभा में पेश करेगी। लोकसभा की वेबसाइट पर साझा की गई जानकारी के मुताबिक, जीवन और कारोबार सुगमता के उद्देश्य से लाए जा रहे इस विधेयक को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सदन में पेश करेंगे।
विधेयक में 350 से अधिक प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। यह देश के कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के सरकार के प्रयासों का हिस्सा है। विधेयक का उद्देश्य कुछ छोटे-मोटे अपराधों को अपराध-मुक्त बनाकर भरोसा आधारित शासन को बढ़ाना देना और जीवन व कारोबार सुगमता की स्थिति को बेहतर करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में कहा था, हमारे देश में ऐसे कानून हैं, जो सुनने में भले ही आश्चर्यजनक लगें, लेकिन मामूली बातों पर कारावास का प्रावधान करते हैं, और किसी ने कभी उन पर ध्यान नहीं दिया।
पीएम नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा नागरिकों को बेवजह सलाखों के पीछे डालने कानून समाप्त
पीएम नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा था, मैंने यह सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया है कि भारतीय नागरिकों को बेवजह सलाखों के पीछे डालने वाले अनावश्यक कानून समाप्त किए जाएं। हमने पहले संसद में एक विधेयक पेश किया था, हम इसे इस बार फिर से लाए हैं। वही एक अधिकारी के मुताबिक, यह नया विधेयक देश में अधिक अनुकूल कारोबारी और नागरिक-केंद्रित वातावरण बनाने में मदद करेगा। इससे पहले 2023 में जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम पारित किया गया था, जिसके तहत 19 मंत्रालयों और विभागों द्वारा प्रशासित कुल 42 केंद्रीय अधिनियमों के 183 प्रावधानों को अपराध-मुक्त कर दिया गया था।

1500 से पुराने कानून खत्म कर चुकी है केंद्र सरकार
जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से सरकार ने कुछ प्रावधानों में कारावास और/या जुर्माने को हटा दिया था। कुछ नियमों में कारावास को हटा दिया गया और जुर्माने को बरकरार रखा गया, जबकि कुछ मामलों में कारावास और जुर्माने को मात्र जुर्माने में ही बदल दिया गया था। सरकार पूर्व में 40,000 से ज्यादा अनावश्यक प्रावधानों को खत्म कर चुकी है। इसने 1,500 से ज्यादा पुराने पड़ चुके कानूनों को समाप्त किया है।