कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक कड़ा पत्र लिखते हुए संसद में बोलने से रोके जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा रोकने का प्रयास करार दिया।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोके जाने पर नाराज़गी
राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा कि जब वे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बोल रहे थे, तब उनसे जिस पत्रिका का हवाला दिया जा रहा था उसकी प्रमाणिकता सत्यापित करने को कहा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले ही दिन उन्होंने दस्तावेज को प्रमाणित कर दिया था।
उन्होंने संसदीय परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि किसी दस्तावेज के प्रमाणित हो जाने के बाद स्पीकर की भूमिका समाप्त हो जाती है और उसके बाद सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसका उत्तर दे।

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संसदीय परंपराओं के उल्लंघन का आरोप

राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि उन्हें बोलने से रोकना केवल परंपराओं का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर संवैधानिक चिंता का विषय है। विपक्ष के नेता के रूप में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बोलने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

“राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा जरूरी है” – राहुल गांधी

उन्होंने याद दिलाया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा एक प्रमुख विषय था और संसद में इस पर खुलकर चर्चा होना आवश्यक है। राहुल गांधी ने लिखा कि संसद के प्रत्येक सदस्य, विशेषकर विपक्ष के नेता को अपनी बात रखने का अधिकार है और इसकी रक्षा करना स्पीकर की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

“लोकतंत्र पर कलंक” बताया घटना को

पत्र में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि संसदीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब सरकार के कहने पर स्पीकर ने विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोका। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर कलंक बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

चीन, पाकिस्तान और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलना चाहता हूं – राहुल गांधी

इससे पहले सदन में राहुल गांधी ने कहा था कि राष्ट्रपति के भाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसमें भारत, चीन और पाकिस्तान के संबंधों का ज़िक्र है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जिस लेख का हवाला दिया है, उसकी पुष्टि कर ली गई है और उसमें प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया से जुड़ा अहम बिंदु शामिल है।

वैश्विक राजनीति और भारत की भूमिका पर सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि आज विश्व मंच पर चीन और अमेरिका के बीच संघर्ष सबसे बड़ा मुद्दा है और भारत को किस रास्ते पर चलना है, यह राष्ट्रपति के भाषण का केंद्र रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि चीन के साथ भारत के अनुभव और उस पर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया पर बयान देने से उन्हें क्यों रोका जा रहा है।

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