मकर संक्रांति

मकर संक्रांति क्या है और इसे मनाने की परंपराएँ क्या है? 

मकर संक्रांति क्या है?

makar sankranti: मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख और प्राचीन पर्व है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, यानी सूर्य की गति दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर हो जाती है। मकर संक्रांति आमतौर पर 14 या  कभी – कभी 15 जनवरी को भी मनाई जाती है। इसे कृषि पर्व भी कहा जाता है क्योंकि यह फसलों की कटाई के समय आता है।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व और वैज्ञानिक महत्व 

धार्मिक महत्व

  • इस दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है।
  • मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने उत्तरायण के समय ही अपने प्राण त्यागे थे।
  • इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है, जैसे तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र और अन्न का दान।

वैज्ञानिक महत्व

वैज्ञानिक दृष्टि से यह पर्व ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है। शीत ऋतु धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है और दिन बड़े होने लगते हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य और कृषि दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

मकर संक्रांति

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?

  • सूर्य देव की उपासना के लिए
  • ऋतु परिवर्तन के स्वागत हेतु
  • किसानों की मेहनत और नई फसल की खुशी में
  • समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और एकता और दान, सेवा को बढ़ाने के लिए

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मकर संक्रांति को मनाने की परंपराएँ 

भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति अलग-अलग नामों और तरीकों से मनाई जाती है:

1. उत्तर भारत

  • सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है।
  • तिल-गुड़ से बनी मिठाइयाँ खाई जाती हैं और बांटी जाती हैं।
  • पतंग उड़ाने की परंपरा बहुत प्रसिद्ध है।

2. गुजरात और राजस्थान

  • यहां मकर संक्रांति को पतंग महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
  • आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है।

3. महाराष्ट्र

  • लोग एक-दूसरे को “तिळगुळ घ्या, गोड गोड बोला” कहकर तिल-गुड़ देते हैं।

4. तमिलनाडु

  • मकर संक्रांति को पोंगल कहा जाता है और यह चार दिनों तक मनाया जाता है।
  • सूर्य देव को धन्यवाद देने के लिए नए चावल से पोंगल बनाया जाता है।

5. पंजाब और हरियाणा

  • इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है।
  • आग जलाकर लोकगीत गाए जाते हैं और मूंगफली, रेवड़ी आदि बांटी जाती हैं।

6. असम

  • यहां इसे भोगाली बिहू कहा जाता है और सामूहिक भोज का आयोजन होता है।

मकर संक्रांति पर क्या खाया जाता है?

  • तिल और गुड़ की मिठाइयाँ
  • खिचड़ी
  • चावल, दाल, गन्ने के उत्पाद
  • मूंगफली, रेवड़ी, चिवड़ा दही

मकर संक्रांति का सामाजिक महत्व

  • यह पर्व आपसी मेल-जोल और सौहार्द का प्रतीक है।
  • दान और सेवा के माध्यम से समाज में समानता का भाव पैदा करता है।
  • ऋतु परिवर्तन के कारण स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

निष्कर्ष

मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य और परिश्रम के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है। यह हमें दान, प्रेम, एकता और सकारात्मक सोच का संदेश देता है।

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Note:

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By: KP
Edited  by: KP

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