पटना। बच्चों की शुरुआती पढ़ाई की किताब में छपी एक छोटी-सी गलती अब पटना हाईकोर्ट तक पहुंच गई है। एनसीईआरटी की कक्षा-1 की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘सारंगी भाग-01’ में प्रसिद्ध बाल कविता ‘चंदा मामा दूर के’ की एक पंक्ति में कथित तौर पर गलत और आपत्तिजनक शब्द छपने का मामला सामने आया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
अदालत ने संबंधित मामले में केंद्र सरकार को जवाबी NCERT की किताब में ‘चंदा मामा दूर के’ कविता पर विवाद, पटना हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी।
कविता की एक पंक्ति में कथित गलती से बदला अर्थ
मामला एनसीईआरटी की हिंदी पुस्तक ‘सारंगी भाग-01’ में शामिल ‘चंदा मामा दूर के’ कविता की दूसरी पंक्ति से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शोवेन्द्र कुमार ने अदालत को बताया कि कविता में एक शब्द गलत तरीके से प्रकाशित हुआ है, जिससे पूरी पंक्ति का अर्थ बदल जाता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, याचिका में कहा गया है कि वहां सही शब्द ‘गुड़’ होना चाहिए था और पंक्ति ‘पुआ पकाए गुड़ के’ होनी चाहिए। इसके स्थान पर कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्द छप गया।
2023 में प्रकाशित हुई थी किताब
याचिका के अनुसार संबंधित पुस्तक वर्ष 2023 में प्रकाशित हुई थी। याचिकाकर्ता का दावा है कि कथित त्रुटि सामने आने के बावजूद लंबे समय तक इसमें सुधार नहीं किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता सोमित्र शंकर, निवासी मुसल्लहपुर, पटना ने इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की है। याचिका में बच्चों की पाठ्यपुस्तक में ऐसी त्रुटि को गंभीर विषय बताया गया है।
21 जुलाई को किताब खरीदकर सत्यापन का दावा
याचिका में कहा गया है कि कथित गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद 21 जुलाई 2026 को पटना के कदमकुआं स्थित ज्ञान गंगा बुक डिपो से पुस्तक खरीदी गई और उसमें प्रकाशित सामग्री का सत्यापन किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी तर्क रखा गया कि कक्षा-1 के बच्चों के लिए तैयार की गई पाठ्यपुस्तक में भाषा और सामग्री की जांच में विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।
महिलाओं की गरिमा और बच्चों की शिक्षा का मुद्दा भी उठाया
याचिका में कथित आपत्तिजनक शब्द को लेकर सामाजिक मर्यादा और महिलाओं की गरिमा से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि बच्चों की पाठ्यपुस्तक में इस तरह की भाषा का प्रकाशित होना चिंता का विषय है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में रखे गए आरोप और तर्क हैं। मामले में केंद्र सरकार का पक्ष और अदालत का अंतिम निर्णय अभी सामने आना बाकी है।
पटना हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने की। अदालत ने केंद्र सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी। उस सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से अदालत के सामने अपना पक्ष और स्थिति स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला सिर्फ कविता की एक पंक्ति में कथित मुद्रण त्रुटि तक सीमित नहीं है। इससे बच्चों की पाठ्यपुस्तकों की प्रूफरीडिंग, प्रकाशन से पहले सामग्री की जांच और गलती सामने आने के बाद उसमें सुधार की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठते हैं।
अब सबकी नजर 13 अक्टूबर की अगली सुनवाई पर है, जहां केंद्र सरकार का जवाब सामने आने के बाद मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।
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Written & Edit by : Chandan Patel

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