नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 23 जून को हुए विवाद के करीब डेढ़ महीने बाद दिल्ली में एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को कार्यकर्ता नीशू भारद्वाज के पिता संजय कुमार के साथ कथित मारपीट के विरोध में मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन तक पहुंचे और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन में CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मामले में FIR दर्ज होने के बावजूद आरोपी के खिलाफ अब तक पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा चुकी है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
23 जून को जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?
CJP कार्यकर्ता नीशू आजाद के पिता संजय कुमार 23 जून को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान घायल हुए थे। संजय की शिकायत के आधार पर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में मामला दर्ज किया गया।
परिवार का आरोप है कि विवाद के दौरान संजय के सिर पर हमला किया गया, जिससे उन्हें चोट लगी। नीशू का कहना है कि घटना को करीब डेढ़ महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई को लेकर परिवार संतुष्ट नहीं है।
आरोपी के वायरल पॉडकास्ट वीडियो से बढ़ा विवाद
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में स्वतंत्र संजय कुमार के सिर पर हमला करने की बात स्वीकार करते नजर आते हैं।
हालांकि, स्वतंत्र का कहना है कि उन्होंने हमला सेल्फ डिफेंस में किया था। उनके मुताबिक, उन्हें 10-15 लोगों ने घेर लिया था और उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।
स्वतंत्र ने यह भी दावा किया कि घटना में उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा और संजय को सिर में गंभीर चोट लगी थी।
CJP नेता सौरव दास ने पुलिस से पूछे सवाल
वायरल वीडियो को लेकर CJP नेता सौरव दास ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि यदि आरोपी सार्वजनिक रूप से संजय पर हमला करने की बात स्वीकार कर रहा है, तो पुलिस को मामले में आगे की कार्रवाई स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए।
CJP की ओर से आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
पीड़ित पक्ष का क्या कहना है?
पीड़ित पक्ष के अनुसार, संजय कुमार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सिर में चोट लगी थी। परिवार का आरोप है कि उन्हें गंभीर चोट पहुंचाई गई और इस मामले में पुलिस को अब तक अपेक्षित कार्रवाई करनी चाहिए थी।
नीशू आजाद का कहना है कि FIR दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई में देरी से परिवार को न्याय मिलने को लेकर चिंता है।

आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का पक्ष
स्वतंत्र भारद्वाज ने वायरल पॉडकास्ट में संजय के सिर पर हमला करने की बात कही, लेकिन इसे हमला नहीं बल्कि आत्मरक्षा यानी सेल्फ डिफेंस बताया।
उनका दावा है कि उस समय करीब 10-15 लोगों ने उन्हें घेर लिया था। स्वतंत्र के मुताबिक, यदि वह अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई नहीं करते तो भीड़ उन्हें नुकसान पहुंचा सकती थी।
इस तरह आरोपी ने घटना को आत्मरक्षा की परिस्थिति में हुई कार्रवाई बताया है।
दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 23 जून को हुई घटना में संजय कुमार के सिर पर कड़े/ब्रेसलेट से चोट लगी थी। उन्हें मेडिकल जांच के लिए राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस के अनुसार मेडिको-लीगल केस (MLC) में चोट को साधारण बताया गया था। पुलिस ने खोपड़ी फटने या फ्रैक्चर होने के दावे को गलत बताया है।
पुलिस के मुताबिक, सूरज कुमार (24) और स्वतंत्र भारद्वाज (21) को घटना के बाद मौके से हिरासत में लिया गया था। जांच के दौरान दोनों से पूछताछ की गई और उन्हें नोटिस भी दिया गया।
पुलिस का कहना है कि मामले में कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है और जांच पूरी होने के बाद जल्द चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
पुलिस और CJP के दावों में अंतर
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि पीड़ित पक्ष और पुलिस के दावों में अंतर दिखाई दे रहा है। जहां परिवार की ओर से गंभीर चोट और कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया जा रहा है, वहीं पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट में चोट साधारण पाई गई थी और मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा चुकी है।
अब मामले में आगे की जांच और प्रस्तावित चार्जशीट से यह स्पष्ट होगा कि पुलिस ने घटना में किन धाराओं के तहत कार्रवाई की है और आरोपों को लेकर जांच का निष्कर्ष क्या निकलता है।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ी राजनीतिक और कानूनी बहस
स्वतंत्र भारद्वाज का वायरल पॉडकास्ट वीडियो सामने आने के बाद इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज कर दी है। एक तरफ CJP समर्थक पुलिस से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ आरोपी इसे आत्मरक्षा की घटना बता रहा है।
फिलहाल इस मामले में अदालत का अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों और वायरल वीडियो के आधार पर किसी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। वही मामले की अंतिम स्थिति पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
जंतर-मंतर की 23 जून की घटना को लेकर करीब डेढ़ महीने बाद CJP का सड़क पर उतरना
जंतर-मंतर की 23 जून की घटना को लेकर करीब डेढ़ महीने बाद CJP का सड़क पर उतरना दिल्ली की कानून-व्यवस्था और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर नए सवाल खड़े करता है। अब सबकी नजर पुलिस की चार्जशीट और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है।
नोट: इस खबर में पीड़ित पक्ष, आरोपी और दिल्ली पुलिस – तीनों के पक्ष को शामिल किया गया है। आरोपी पर लगे आरोप अदालत में सिद्ध होना बाकी हैं।
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Written & Edit by : Chandan Patel

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