Nepal Flood News: नेपाल में पिछले दिनों आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ प्रभावित बिदुर इलाके में सोमवार को एक घर के मलबे से एक बच्चे समेत 24 शव बरामद किए गए। पुलिस को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी कई लोग दबे हो सकते हैं। इस आपदा में नेपाल और तिब्बत में अब तक 955 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारत ने भी अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमों को नेपाल भेजकर खोज एवं बचाव अभियान में सहयोग दिया है।
बिदुर में मलबे से निकले 24 शव, कई और लोगों के दबे होने की आशंका
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल बिदुर में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक घर के मलबे से 24 शव बरामद किए गए। इनमें एक बच्चा भी शामिल है।
पुलिस के मुताबिक, जिस जगह से शव बरामद किए गए हैं, वहां मलबे के नीचे अभी और लोगों के दबे होने की आशंका है। ऐसे में बचाव दल लगातार मलबा हटाने और संभावित लोगों की तलाश में जुटे हैं।
नेपाल-तिब्बत बाढ़ में 955 लोगों की मौत
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक 955 लोगों की जान जा चुकी है।
इनमें:
- नेपाल में 939 लोगों की मौत
- तिब्बत में 16 लोगों की मौत
- करीब 4,471 लोग अभी भी लापता
- लगभग 65 हजार प्रभावित लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाई गई
बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई इलाकों में सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे भी प्रभावित हुए हैं। दुर्गम क्षेत्रों में राहत और बचाव दलों को पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत ने 158 नागरिकों को सुरक्षित निकाला
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए भी भारत ने बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, बाढ़ के बाद 158 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
भारत की ओर से फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमें भी नेपाल में भेजी गई हैं, जो नेपाली अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
चिलिमे में सुरंग तक पहुंची भारतीय टनल रेस्क्यू टीम
भारतीय टनल रेस्क्यू टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग की हाइड्रोपावर परियोजनाओं में खोज एवं बचाव अभियान चला रही है।
चिलिमे में खराब मौसम और बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय टीम सुरंग तक पहुंचने में सफल रही। टीम ने सुरंग के अंदर सुरक्षा रस्सियां भी लगाई हैं, जिससे आगे की तलाशी के दौरान बचावकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वहीं लांगटांग में भारतीय टीम ने सुरंग के भीतर करीब 185 मीटर तक जांच की है। बचाव अभियान मंगलवार को भी जारी रहने की जानकारी दी गई है।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी साझा की।
काठमांडू में भारतीय फोरेंसिक टीम ने संभाला मोर्चा
बाढ़ में बड़ी संख्या में लोगों की मौत के बाद शवों की पहचान भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसी को देखते हुए भारत की फोरेंसिक टीम काठमांडू में नेपाल पुलिस की फोरेंसिक साइंस लैब के विशेषज्ञों के साथ काम कर रही है।
दोनों देशों की टीमों ने शवों की पहचान, जांच और जरूरी दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर आपसी समन्वय किया है।
नेपाल से बहकर उत्तर प्रदेश पहुंचे 17 शव
नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत के उत्तर प्रदेश तक भी दिखाई दिया है। नेपाल में बाढ़ के तेज बहाव में बहे लोगों के 17 शव उत्तर प्रदेश में गंडक नदी से बरामद किए गए हैं।
इनमें से 13 शव कुशीनगर जिले के खड्डा और तमकुही राज तहसील क्षेत्र में मिले हैं।
वहीं महाराजगंज जिले में मिले चार शव सोमवार को नेपाल प्रशासन को सौंप दिए गए। अधिकारियों के अनुसार, इनमें तीन महिलाएं शामिल थीं।
शवों की पहचान नहीं होने की स्थिति में पोस्टमॉर्टम के दौरान DNA सैंपल भी सुरक्षित किए गए हैं, ताकि आगे चलकर मृतकों की पहचान की जा सके।
चीन ने चेतावनी देने का किया दावा
बाढ़ से पहले जरूरी मौसम संबंधी डेटा साझा नहीं करने के आरोपों के बीच चीन ने कहा है कि उसके वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर ने नेपाल को 12 दिन पहले ही ईमेल के जरिए चेतावनी भेजी थी।
चीन के मुताबिक, नेपाल को भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड की संभावित स्थिति के बारे में जानकारी दी गई थी।
हालांकि, इस दावे और बाढ़ से पहले चेतावनी प्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नेपाल में आपदा प्रबंधन और समय पर सूचना पहुंचाने की व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हो गई है।
राहत और बचाव अभियान अब भी जारी
नेपाल में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने की है।
भारत समेत कई एजेंसियां नेपाल के राहत एवं बचाव अभियान में सहयोग कर रही हैं। टनल रेस्क्यू, फोरेंसिक जांच और शवों की पहचान का काम भी लगातार जारी है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मलबे के नीचे और कितने लोग दबे हैं और लापता लोगों में से कितने लोगों को सुरक्षित बचाया जा सकेगा। बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
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Written & Edit by : Chandan Patel

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