Jamui/Gidhour: ऐतिहासिक गिद्धौर राज रियासत से जुड़ी एक बेहद दुखद और युगांतकारी खबर मंगलवार को सामने आई। राजघराने के अंतिम महाराजा कुंवर राज राजेश्वर प्रसाद सिंह का कोलकाता में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही गिद्धौर राजपरिवार के एक गौरवशाली युग का अंत हो गया।
कोलकाता के निजी अस्पताल में ली अंतिम सांस
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महाराजा ने मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे कोलकाता के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और वहीं उनका इलाज जारी था। गिद्धौर राजमहल से जुड़े कर्मियों ने पुष्टि करते हुए बताया कि उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था। चिकित्सकों की पूरी कोशिश के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
राजपरंपरा के अनुसार हुआ अंतिम संस्कार
महाराजा के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार राजपरिवार के सदस्य आनंद सिंह द्वारा विधिवत संपन्न कराया गया। इस दौरान परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
बिना राज्याभिषेक के भी निभाई परंपरा
ज्ञात हो कि महाराजा कुंवर राज राजेश्वर प्रसाद सिंह ने आजीवन विवाह नहीं किया था। स्वतंत्रता के बाद देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू होने के कारण उनका औपचारिक राज्याभिषेक नहीं हो सका, लेकिन अपने पिता के निधन के बाद राजपरंपरा के अनुसार उन्हें गिद्धौर महाराज की उपाधि स्वतः प्राप्त हो गई थी। वे अपने जीवनकाल में राजपरिवार की गरिमा, परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा के प्रतीक माने जाते थे। सादगी और शांत स्वभाव उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।
सादगी और समाज के प्रति लगाव के लिए याद किए जाएंगे
महाराजा का जीवन भले ही राजसी था, लेकिन उनका व्यक्तित्व बेहद सरल और जमीन से जुड़ा हुआ था। वे क्षेत्र के लोगों से आत्मीय संबंध रखते थे और हमेशा सामाजिक सरोकारों में रुचि लेते थे। उनकी सादगी, विनम्रता और लोगों के प्रति अपनापन आज भी लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।
पूरे जमुई और गिद्धौर क्षेत्र में शोक की लहर
महाराजा के निधन की खबर मिलते ही गिद्धौर सहित पूरे जमुई जिले में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजपरिवार से जुड़े लोगों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया है।
लोग भावुक होकर उन्हें याद कर रहे हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
एक युग का अंत
महाराजा कुंवर राज राजेश्वर प्रसाद सिंह का निधन केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि गिद्धौर की ऐतिहासिक विरासत के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन है। उनकी स्मृतियां, उनकी सादगी और उनके संस्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बने।

