झाझा/जमुई : सरकार की बहुमुखी सात निश्चय योजना के तहत शुरू की गई नल-जल योजना का लाभ झाझा प्रखंड के कई गांवों तक आज भी नहीं पहुंच पाया है। प्रखंड क्षेत्र के कानन पंचायत अंतर्गत तेतरिया, पहाड़पुरा और खुर्द तेतरिया गांव के वार्ड संख्या-3 में पेयजल की समस्या दिन-ब-दिन गहराती जा रही है। करीब 5000 की आबादी आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रही है।

8 साल बाद भी अधूरी योजना

ग्रामीणों के अनुसार, लगभग आठ साल पहले इस वार्ड में नल-जल योजना के तहत काम शुरू किया गया था। लोगों के घरों तक पाइप भी बिछाए गए, लेकिन बोरिंग सही नहीं रहने के कारण आज तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना कागजों तक ही सीमित रह गई है।

योजना
जल नल योजना के तहत पानी का आज भी इंतजार

कुएं और सबमर्सिबल पर निर्भर ग्रामीण

जलापूर्ति नहीं होने के कारण ग्रामीणों को पीने और दैनिक उपयोग के लिए कुएं, बधार और दूसरे गांवों के सबमर्सिबल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई बार लोगों को मसानघाट, चिलको और नियाशी टोला तक जाकर पानी लाना पड़ता है।

महिलाओं की बढ़ी परेशानी

गांव की महिलाओं को हर दिन पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। सुबह से ही बधार स्थित सबमर्सिबल या अन्य घरों के नलों पर लाइन लगानी पड़ती है, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

बीमारियों का खतरा बढ़ा

ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें कुएं का पानी पीना पड़ता है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। साफ पानी के अभाव में बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।

ग्रामीणों में आक्रोश

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार विभागीय अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सात साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

क्या कहते हैं ग्रामीण?

रूबी खातून: “बोरिंग को सात साल से ज्यादा हो गए, पाइप भी बिछे लेकिन आज तक पानी नहीं आया। प्रशासन ध्यान दे ताकि गर्मी में राहत मिल सके।”

 

सुबीला खान: “बारिश हो या गर्मी, हमें हर दिन पुराने और खतरनाक कुएं पर जाना पड़ता है। पीएचईडी को हमारी कोई चिंता नहीं है।”

 

रुकसाना खातून: “मुख्यमंत्री की यह योजना यहां अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। हमलोग पानी के लिए तरस रहे हैं।”

 

मो. आरिफ: “शुरुआत में बोरिंग हुई, फिर पाइप बिछे। लगा टंकी भी लगेगी, लेकिन आज तक पानी नहीं आया। बच्चे बड़े हो गए, पर सपना अधूरा है।”

क्या कहते हैं अधिकारी?

पीएचईडी के कनीय अभियंता सद्दाम हुसैन ने बताया कि तेतरिया और पहाड़पुरा गांव में नल-जल योजना चालू नहीं हो सकी है। बोरिंग फेल होने समेत अन्य कारणों की जांच की जा रही है। जल्द ही योजना को चालू कर ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द योजना को चालू करने की मांग की है, ताकि उन्हें असुरक्षित जल स्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े और उन्हें स्वच्छ पेयजल मिल सके।

जमीनी हकीकत में फेल होना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता

सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का जमीनी हकीकत में फेल होना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि हजारों ग्रामीणों के जीवन पर सीधा असर डाल रहा है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग कब तक इस गंभीर समस्या का समाधान करता है।

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