दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले से जुड़े बहुचर्चित मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को बड़ा झटका दिया है। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने 598 पेज के विस्तृत आदेश में कहा कि मुख्य चार्जशीट और चार पूरक चार्जशीटों में अपराध का एक भी ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। अदालत ने पूरी चार्जशीट को खारिज करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद केंद्रीय एजेंसियों की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर देशभर में बहस तेज हो गई है।

“हजारों पन्नों में ठोस सबूत नहीं” – अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने कहा कि 24 नवंबर 2022 को दायर मुख्य चार्जशीट और उसके बाद दाखिल चार पूरक चार्जशीटों में पेश दस्तावेज गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते। जज ने जांच को विरोधाभासी और हेरफेर से भरी बताते हुए जांच अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश तक कर दी।
फैसले में कहा गया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा और किसी आपराधिक साजिश का स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिला। अदालत ने सीबीआई के दावों को “अनुमान-आधारित” करार दिया।

जेल में बिताए समय पर भी अदालत की टिप्पणी

फैसले में अदालत ने आरोपियों की हिरासत अवधि पर भी टिप्पणी की।

  • मनीष सिसोदिया करीब 530 दिन जेल में रहे।
  • अरविंद केजरीवाल दो अलग-अलग अवधियों में 156 दिन हिरासत में रहे।

गौरतलब है कि 13 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को सीबीआई मामले में जमानत दी थी। अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोप तय करने पर फैसला 12 फरवरी 2026 को सुरक्षित रखा गया था।

‘साउथ ग्रुप’ शब्द पर अदालत की नाराजगी

सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘साउथ ग्रुप’ शब्द पर कड़ी आपत्ति जताई। जज ने सवाल किया कि यदि यही चार्जशीट चेन्नई में दायर होती तो क्या वहां भी ‘साउथ ग्रुप’ लिखा जाता?

अदालत ने कहा कि इस तरह के शब्द पूर्वाग्रह पैदा करते हैं और निष्पक्ष जांच की भावना के खिलाफ हैं। जज ने एक अमेरिकी मामले का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की समूहगत संज्ञाएं केस को प्रभावित कर सकती हैं।

“केजरीवाल का नाम बाद में जोड़ा गया” – बचाव पक्ष की दलील

सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल का नाम शुरुआती तीन चार्जशीट में नहीं था, बल्कि चौथी पूरक चार्जशीट में जोड़ा गया। उन्होंने इसे राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित कार्रवाई बताया। ‘कन्फेशनल स्टेटमेंट’ को लेकर भी अदालत ने सीबीआई पर नाराजगी जताई, खासकर तब जब एजेंसी ने बयान को ‘सील कवर’ में होने की बात कही।

दिल्ली
पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया

“फाइलें आपसे बात करने लगती हैं” – जज की अहम टिप्पणी

फैसले के दौरान जज ने कहा,

“जब आप किसी फाइल को बहुत गहराई से और बार-बार पढ़ते हैं, तो फाइलें आपसे बात करने लगती हैं।”

इस टिप्पणी को चार्जशीट की विसंगतियों और कमजोर साक्ष्यों की ओर संकेत माना जा रहा है।

पूरी टाइमलाइन: शिकायत से बरी होने तक

20 जुलाई 2022: एलजी की शिकायत के बाद सीबीआई जांच की सिफारिश।
17 अगस्त 2022: एफआईआर दर्ज (RC0032022A0053, CBI/ACB, दिल्ली)।
24 नवंबर 2022: मुख्य चार्जशीट (A-1 से A-7)।
25 अप्रैल 2023: पहली पूरक चार्जशीट (A-8 से A-11)।
8 जुलाई 2023: दूसरी पूरक चार्जशीट (A-12 से A-16)।
6 जून 2024: तीसरी पूरक चार्जशीट (A-17)।
29 जुलाई 2024: चौथी पूरक चार्जशीट (A-18 से A-23)।
12 फरवरी 2026: ऑर्डर ऑन चार्ज सुरक्षित।
27 फरवरी 2026: सभी आरोपी बरी।

दिल्ली की राजनीतिक और कानूनी असर

यह फैसला न केवल दिल्ली की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी गूंज पैदा कर सकता है। केंद्रीय एजेंसियों की निष्पक्षता, जांच की गुणवत्ता और लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में चुनौती दी जाती है या नहीं। फिलहाल, राउज एवेन्यू कोर्ट का यह फैसला दिल्ली की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

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