गिद्धौर/जमुई : मौरा बालू घाट पर हो रहा बालू खनन अब सिर्फ़ नियमों का उल्लंघन नहीं रहा, बल्कि यह किसानों की रोज़ी-रोटी पर सीधा हमला बन चुका है। प्रधानचक गांव को जाने वाली मुख्य सिंचाई पईन पूरी तरह सूख चुकी है। जिस पईन से सैकड़ों एकड़ खेतों में हरियाली पहुंचती थी, आज वहां सिर्फ़ दरारें और सन्नाटा है।

गेहूं, सरसों, चना और आलू की फसलें खेतों में खड़ी होकर पानी के लिए तरस रही हैं। किसान बताते हैं कि पिछले पंद्रह दिनों से वे जिला प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं—कभी आवेदन, कभी फरियाद—लेकिन हर बार सिर्फ़ खामोशी मिली। नतीजा यह हुआ कि बालू उठाव के शुरुआती दौर में ही प्रधानचक समेत आधा दर्जन गांवों की जीवनरेखा कही जाने वाली यह सिंचाई पईन पूरी तरह सूख गई।

अब हालत यह है कि बरनार नदी से भी खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। किसानों की आंखों के सामने उनकी मेहनत सूख रही है। उनका कहना है—

“अगर अभी यही हाल है, तो आने वाले दिनों में खेती पूरी तरह ठप हो जाएगी।”

सिर्फ़ खेती ही नहीं, पेयजल संकट भी सिर उठाने लगा है। जलस्तर नीचे जाने से दर्जनों गांवों में पीने के पानी की समस्या गहराने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, मौरा बालू घाट पर हो रहे खनन की वजह से मंझला बहियार, पुआरी पछियारी प्रधानचक, निजवारा, जीत झिंगोई, सिमरिया और धोबघट बुढ़िया , सिमरिया, गेरुवाडीह समेत कई सिंचाई पईनों में पानी की धार ही नहीं पहुंच पा रही। बालू खनन से कई एकड़ खेत बालू में समा गई है। जिससे किसानों को अपने खेत से हाथ धोना पड़ा क्योंकि नदियों से खनन के चलते खेतों में बालू भर जाने के कारण किसान कराह रहा है।

सबसे बड़ा दर्द यह है कि किसानों ने साहूकारों से कर्ज लेकर फसल बोई थी। अब अगर फसल बर्बाद हुई, तो उनकी आर्थिक हालत पूरी तरह टूट जाएगी। यह सिर्फ़ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि भविष्य का उजड़ना है। धरना स्थल पर बैठे किसानों की आंखों में गुस्सा कम, बेबसी ज़्यादा है। इस दौरान किसान दिनेश रावत, सरजू यादव, मनोज सिंह, मनीष रावत, विकास रावत समेत कई किसान मौजूद रहे।

सातवें दिन भी जारी किसानों का अनिश्चितकालीन धरना

मौरा बालू घाट में हो रहे खनन के विरोध में आधा दर्जन से अधिक गांवों के किसानों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन अब रफ्तार पकड़ चुका है और किसान दिन-रात धरना स्थल पर डटे हुए हैं। किसानों का साफ़ कहना है—

“जब तक मौरा नदी से बालू खनन पूरी तरह बंद नहीं होता, आंदोलन नहीं रुकेगा।”

मौरा
सातवें दिन भी जारी किसानों का अनिश्चितकालीन धरना

रविवार को इस आंदोलन को इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी का समर्थन मिला। पार्टी के जिलाध्यक्ष शंभू कुमार समर्थकों के साथ धरना स्थल पहुंचे और किसानों की मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। उन्होंने सरकार से मांग की कि बरनार नदी अंतर्गत मौरा बालू घाट पर हो रहे खनन पर तुरंत रोक लगाई जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि संवेदक और उसके कर्मियों ने खनन विभाग को अंधेरे में रखकर प्रतिबंधित मौरा नदी घाट को दोबारा चालू करवा दिया। यह न केवल कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि पर्यावरण के साथ खुला खिलवाड़ भी है। नेताओं ने भरोसा दिलाया कि पार्टी के संस्थापक और सहरसा से विधायक ई. आइपी गुप्ता भी जल्द ही आंदोलन स्थल पर पहुंचकर किसानों के साथ खड़े होंगे।

मौरा बालू घाट संवेदक दिन दहाड़े राइफल लेकर घूमते

जिले के सफेदपोष नेता और जिला प्रशासन मामले की लीपापोती में लगे हुये जिसका परिणाम है। कि बालू माफियाओं के मनोबाल इतना बढ़ गया कि मौरा बालू घाट संवेदक दिन दहाड़े राइफल लेकर घूमने से ग्रामीण में भय का माहोल व्याप्त हो गया है। मौके पर अशोक सिंह, गोपाल कुमार झा, सुभाष सिंह, अनिल रावत, मनोज सिंह, सरवन कुमार यादव, विक्रम यादव उमेश यादव, कैलाश रावत, सुगदेव शाह, घुटर सिंह, कुमोत सिंह, सचित रावत, सहित दर्जनों किसान आंदोलनरत थे।

आज सवाल सिर्फ़ बालू खनन का नहीं है। सवाल यह है कि क्या कानून सिर्फ़ कागज़ों में जिंदा रहेंगे?

क्या पर्यावरण और किसानों की जिंदगी, कुछ लोगों के मुनाफ़े से कम क़ीमती है?

अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो खेतों के सूखने के साथ-साथ गांवों की उम्मीदें भी सूख जाएंगी।

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