देश की राजधानी दिल्ली, जहां सुरक्षा के दावे रोज़ किए जाते हैं, वहीं उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क इलाके में शनिवार रात गोलियों की आवाज़ ने एक बार फिर इन दावों की पोल खोल दी। बुलंद मस्जिद बिहारी चौक पर 35 वर्षीय समीर की अज्ञात बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी। चंद सेकेंड में एक ज़िंदगी खत्म हो गई और परिवार हमेशा के लिए उजड़ गया।
खाना खाकर निकला था टहलने, लौटकर नहीं आया
परिजनों के मुताबिक, समीर रोज़ की तरह खाना खाकर घर से बाहर टहलने के लिए निकला था। किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह उसकी आख़िरी सैर होगी। कुछ ही देर बाद घर में चीख-पुकार मच गई, जब खबर आई कि समीर को गोलियों से भून दिया गया है। जिस बेटे के लौटने का इंतज़ार था, उसकी लाश अस्पताल भेजी जा चुकी थी।
चार से पांच गोलियां, मौके पर ही मौत
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने बेहद नज़दीक से चार से पांच राउंड फायरिंग की। गोलियों की आवाज़ से पूरा इलाका सहम गया। समीर को बचने का कोई मौका तक नहीं मिला और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह हत्या किसी फिल्मी सीन जैसी नहीं, बल्कि राजधानी की सच्ची और डरावनी हकीकत है।
24 घंटे में दूसरी हत्या, इलाके में दहशत का माहौल
चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले 24 घंटे के भीतर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में यह दूसरी हत्या की वारदात है। लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं ने लोगों के मन में डर भर दिया है। शाम ढलते ही सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
दिल्ली पुलिस जांच में जुटी, CCTV फुटेज खंगाले जा रहे
वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और चश्मदीदों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए गुरु तेग बहादुर अस्पताल भेज दिया है। शुरुआती जांच में आपसी रंजिश की आशंका जताई जा रही है, लेकिन अभी तक हमलावर पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

सवालों के घेरे में दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा है। सवाल उठता है कि जब राजधानी के रिहायशी इलाकों में खुलेआम गोलियां चलेंगी, तो आम नागरिक खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेगा? हर वारदात के बाद जांच और आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन ज़मीन पर हालात बदले हुए नज़र नहीं आते।
परिवार का दर्द और सिस्टम की चुप्पी
समीर की मौत ने उसके परिवार को तोड़कर रख दिया है। मां-बाप, पत्नी और बच्चे सदमे में हैं। उनका सवाल सीधा है—अगर कानून-व्यवस्था मजबूत होती, तो क्या आज समीर ज़िंदा होता? यह सवाल सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरी दिल्ली का है।
कब थमेगा राजधानी में खून का खेल?
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में बढ़ते अपराध ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, लेकिन आम जनता अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि सुरक्षा चाहती है। जब तक अपराधियों में कानून का डर नहीं होगा, तब तक राजधानी में खून का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
