माँ सरस्वती

नीचे माँ सरस्वती की कथा, वंदना और आरती पूर्ण रूप से सरल व शुद्ध हिंदी में । यह पाठ वसंत पंचमी, पूजा-पाठ, विद्यालयों तथा घरों में पाठ के लिए उपयुक्त है।

माँ सरस्वती का परिचय

माँ सरस्वती विद्या, बुद्धि, ज्ञान, संगीत, कला और वाणी की देवी हैं। वे ब्रह्मा जी की मानस पुत्री मानी जाती हैं। उनका वाहन हंस है, जो विवेक का प्रतीक है, और हाथों में वीणा, पुस्तक, माला तथा कमंडल होता है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जो पवित्रता और शांति का प्रतीक है।

माँ सरस्वती

माँ सरस्वती माता की कथा

प्राचीन काल में जब सृष्टि की रचना हुई, तब ब्रह्मा जी ने देखा कि संसार में सब कुछ होते हुए भी ज्ञान और वाणी का अभाव है। चारों ओर मौन और अज्ञान फैला हुआ था। तब ब्रह्मा जी ने गहन तपस्या की।

उनकी तपस्या से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई, जिनका स्वरूप अत्यंत सुंदर, श्वेत वस्त्रधारी और तेजस्वी था। उनके हाथों में वीणा थी और मुख से मधुर वाणी प्रवाहित हो रही थी। वे थीं माँ सरस्वती।

माँ सरस्वती के प्रकट होते ही संसार में:

  • वाणी आई
  • ज्ञान का प्रकाश फैला
  • संगीत, कला और शिक्षा का आरंभ हुआ

देवताओं, ऋषि-मुनियों और मनुष्यों ने ज्ञान प्राप्त किया। तभी से माँ सरस्वती को विद्या की देवी के रूप में पूजा जाने लगा। वसंत पंचमी के दिन उनका विशेष पूजन किया जाता है।

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माँ सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दु तुषार हार धवला

या शुभ्र वस्त्रावृता।

या वीणा वरदण्ड मण्डित करा

या श्वेत पद्मासना॥

या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभि:

देवैः सदा वन्दिता।

सा मां पातु सरस्वती भगवती

निःशेष जाड्यापहा॥

अर्थ:

जो कुंद के फूल, चंद्रमा और हिम के समान श्वेत हैं, जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथों में वीणा है, जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश पूजते हैं—वे माँ सरस्वती हमारे अज्ञान को दूर करें।

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माँ सरस्वती

माँ सरस्वती की आरती

जय जय सरस्वती माता॥

जय सरस्वती माता॥

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।

सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

जय….. चंद्रवदनि पद्मासिनी, ध्रुति मंगलकारी।

सोहें शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ॥ जय…..

 

बाएं कर में वीणा, दाएं कर में माला।

शीश मुकुट मणी सोहें, गल मोतियन माला ॥ जय…..

 

देवी शरण जो आएं, उनका उद्धार किया।

पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥ जय…..

 

विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो।

मोह, अज्ञान, तिमिर का जग से नाश करो ॥ जय…..

 

धूप, दीप, फल, मेवा मां स्वीकार करो।

ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो ॥ जय…..

मां सरस्वती की आरती जो कोई जन गावें।

हितकारी, सुखकारी, ज्ञान भक्ती पावें ॥ जय…

जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।

सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय.

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By: KP
Edited  by: KP

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