भारत आज “विकसित भारत 2047” के सपने की बात कर रहा है। बड़े-बड़े मंचों से कहा जा रहा है कि भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनेगा, हर नागरिक को बेहतर जीवन मिलेगा, आधुनिक शहर होंगे और बुनियादी सुविधाएँ मजबूत होंगी। लेकिन इसी सपने के बीच इंदौर जैसे शहर से ज़हरीले पानी की खबरें सामने आती हैं, तो यह सवाल अपने आप ही खड़ा हो जाता है—क्या विकास का मतलब सिर्फ भाषण और आंकड़े हैं, या आम आदमी की ज़िंदगी में भी उसका असर दिखना चाहिए?

इंदौर, जिसे देश के सबसे साफ़ शहरों में गिना जाता है, और कई बार साफ़ शहरों का अवॉर्ड ले चुकी वहाँ के कई इलाकों में दूषित और ज़हरीले पानी की शिकायतें सामने आईं। लोग बीमार पड़ने लगे, बच्चों और बुज़ुर्गों की हालत ज्यादा खराब हुई। जिन घरों में रोज़ सुबह नल से पानी आता था, वही पानी डर का कारण बन गया। माताएँ अपने बच्चों को वह पानी पिलाने से पहले सोचने लगीं—“क्या ये पानी ज़हर तो नहीं?” यही वो पल है, जहाँ 2047 के दावे ज़मीन पर आकर टूटते नज़र आते हैं। अगर आज भी देश के बड़े शहरों में लोगों को साफ़ पीने का पानी नसीब नहीं हो पा रहा, तो फिर गाँवों और छोटे कस्बों की हालत का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है। पानी जैसी बुनियादी ज़रूरत पर समझौता, किसी भी विकसित देश की पहचान नहीं हो सकती।

यह सिर्फ इंदौर की समस्या नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जो कागज़ों में तो बहुत मजबूत दिखती है, लेकिन ज़मीन पर अक्सर नाकाम साबित होती है। पाइपलाइन पुरानी हैं, जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं, निगरानी ढीली है और जिम्मेदारी तय करने में सरकार और सिस्टम दोनों पीछे हट जाते हैं। जब लोग बीमार पड़ते हैं, तब जाकर जांच शुरू होती है—लेकिन तब तक नुकसान हो चुका होता है।
भावनात्मक रूप से देखें तो यह सबसे ज्यादा दर्दनाक है। एक मज़दूर, जो दिन भर मेहनत करता है, शाम को घर लौटकर अपने बच्चों को वही पानी पिलाता है, जो बीमारी फैला रहा है। एक माँ, जो अपने परिवार की सेहत की जिम्मेदारी उठाती है, वह खुद को असहाय महसूस करती है। क्या यही “विकसित भारत” का चेहरा है?

विकास का असली मतलब सिर्फ ऊँची इमारतें, स्मार्ट सिटी और चमकदार विज्ञापन नहीं है। असली विकास तब है, जब हर नागरिक को साफ़ पानी, शुद्ध हवा, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ और सुरक्षित जीवन मिले। जब पानी ज़हर बन जाए, तो सारे दावे खोखले लगने लगते हैं।

भारत की राजधानी दिल्ली की हवा में फैला ज़हर

देश की राजधानी दिल्ली में देश के सर्वोच्च पद पर विराजमान से ले कर सबसे नीचे तबके के लोग रहते वहां की हवा बेहद ही खराब है तो क्या हम ऐसे विकसित भारत बनाएंगे, देश में जहां बेरोजगारी चरम सीमा पर, जहां सरकारी अस्पतालों में दवाइयां नहीं, दो वक्त के रोटी के लिए दर दर भटकते लोग तो हम ऐसे विकसित देश होंगे,जहां एक धर्म को दूसरे धर्म के खिलाफ नफ़रत फैला कर आपश में लड़वाकर और समाज को बांट कर हम विकसित भारत बना पाएंगे?

इंदौर की यह घटना एक चेतावनी है—

सरकार, प्रशासन और समाज सभी के लिए। अगर अभी भी हमने बुनियादी सुविधाओं पर गंभीरता से काम नहीं किया, तो 2047 का सपना सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक ही सिमट कर रह जाएगा। विकसित भारत का रास्ता नल के साफ़ पानी से होकर ही जाता है—अगर पानी ही ज़हरीला हो, तो सपना भी ज़हरीला हो जाता है।

भारत
इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 18 लोगो की मौत

 

देश दुनिया की खबरों की अपडेट के लिए AVN News पर बने रहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *