Jagannath Rath Yatra : जगन्नाथ का मतलब है ‘ब्रह्मांड के भगवान’। भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। हर साल ओडिशा के पुरी में भव्य रथ यात्रा का आयोजन होता है। इस पवित्र अवसर पर तीन प्रमुख देवताओं की पूजा होती है:

  • भगवान जगन्नाथ,
  • उनके बड़े भाई बलभद्र
  • बहन सुभद्रा

Jagannath Rath Yatra

किस दिन शुरू हो रही है यात्रा

Jagannath Rath Yatra

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 07 जुलाई, 2024 को सुबह 04:26 बजे शुरू हो रही है और 08 जुलाई, 2024 को सुबह 04:59 बजे समाप्त होगी। इसलिए, उदया तिथि के अनुसार, 2024 में जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 07 जुलाई से शुरू हो रही है।

Jagannath Rath Yatra Facts in Hindi

क्यों निकाली जाती है यात्रा

ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर भगवान जगन्नाथ, उनकी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र को गर्भगृह से बाहर लाकर स्नान कराया जाता है। इसके बाद भगवान जगन्नाथ को बुखार हो जाता है और वे 15 दिनों तक शयन कक्ष में विश्राम करते हैं। इस दौरान भक्तों को उनके दर्शन की अनुमति होती है। फिर, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर, भगवान जगन्नाथ स्वस्थ होकर अपने विश्राम कक्ष से बाहर आते हैं। इस खुशी में भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है।

कैसे की जाती है यात्रा

Jagannath Rath Yatra

भव्य पुरी रथयात्रा के लिए बलराम, श्रीकृष्ण और देवी सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथ बनाए जाते हैं। सबसे आगे बलराम जी का रथ चलता है, बीच में बहन सुभद्रा का और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ जी का रथ होता है। इन विशालकाय रथों पर विराजमान होकर भगवान जगन्नाथ मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं, जहां वे कुछ दिनों के लिए विश्राम करते हैं। इसके बाद वे पुनः अपने घर लौट आते हैं।

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