मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के एलान के बाद बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि अब राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। गांव की चौपाल से लेकर शहर के चौक-चौराहों तक इसी मुद्दे पर चर्चा हो रही है। लोग अपने-अपने राजनीतिक और जातीय समीकरणों के आधार पर संभावित चेहरों का अनुमान लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई नेताओं की तस्वीरें साझा कर उन्हें मुख्यमंत्री बनने की अग्रिम बधाई दी जा रही है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में कई नाम तेजी से चर्चा में हैं।
सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे
राजनीतिक चर्चाओं में सबसे अधिक नाम डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का लिया जा रहा है। माना जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नजर में सम्राट चौधरी एक मजबूत नेता हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान मुंगेर की एक रैली में अमित शाह ने उन्हें बड़ा नेता बनाने की बात भी कही थी।
सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में उन्होंने पार्टी की कमान संभाली थी। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
नित्यानंद राय भी मजबूत दावेदार
मुख्यमंत्री पद की चर्चा में दूसरा बड़ा नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का है। वह यादव समाज से आते हैं और लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। बिहार की जातीय जनगणना के अनुसार यादव समाज की बड़ी आबादी है, जो पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय जनता दल का कोर वोटर माना जाता है। ऐसे में भाजपा अगर सामाजिक समीकरण साधना चाहे तो नित्यानंद राय एक अहम विकल्प हो सकते हैं।
विजय सिन्हा की सख्त छवि भी चर्चा में
तीसरे नंबर पर डिप्टी सीएम विजय सिन्हा का नाम भी तेजी से सामने आ रहा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति और प्रशासनिक सख्ती ने उन्हें एक ईमानदार और मजबूत नेता की छवि दी है। विजय सिन्हा भूमिहार समाज से आते हैं और इस समाज में उनके समर्थन की चर्चा भी हो रही है।
संजीव चौरसिया का नाम भी चर्चा में
भाजपा विधायक संजीव चौरसिया का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में शामिल है। दीघा विधानसभा से तीन बार के विधायक रहे चौरसिया अति पिछड़ा समाज से आते हैं।
भाजपा हाल के वर्षों में अति पिछड़ा वर्ग पर विशेष फोकस कर रही है। यही कारण है कि उनके नाम को भी संभावित चेहरों की सूची में देखा जा रहा है।
दलित चेहरे के तौर पर जनक राम
भाजपा सांसद और पूर्व मंत्री जनक राम को भी मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों में गिना जा रहा है। पार्टी संगठन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। दिग्गज नेता रमई राम के बाद भाजपा के बड़े दलित चेहरे के रूप में जनक राम की पहचान बनी है। ऐसे में सामाजिक समीकरणों के लिहाज से उनका नाम भी चर्चा में है।
दिलीप जायसवाल भी रेस में
वैश्य समाज के कलवार समुदाय से आने वाले दिलीप जायसवाल का नाम भी चर्चा में है। वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में मंत्री हैं।
सीमांचल और कोसी क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। अमित शाह के सीमांचल दौरे के दौरान दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत भी चर्चा का विषय बनी थी।
महिला चेहरे में श्रेयसी सिंह का नाम
अगर भाजपा महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने का फैसला करती है तो श्रेयसी सिंह का नाम सामने आ सकता है। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी हैं और खेल विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंचों पर भी वह कई बार नजर आ चुकी हैं। हालांकि, इससे पहले भाजपा ने रेणु देवी को उपमुख्यमंत्री बनाया था, जो प्रयोग ज्यादा सफल नहीं माना गया।
निशांत कुमार को लेकर भी चर्चा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर भी जदयू के भीतर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि नीतीश कुमार उन्हें राजनीति में आगे लाने से हमेशा बचते रहे हैं।
लेकिन हाल की राजनीतिक परिस्थितियों में जदयू के भीतर कुछ नेता उन्हें उत्तराधिकारी के रूप में देखने लगे हैं। हालांकि भाजपा के समीकरणों में उन्हें मुख्यमंत्री की बजाय उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा ज्यादा है।

बिहार भाजपा नया दांव भी खेल सकती है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अचानक किसी नए चेहरे को भी मुख्यमंत्री बना सकती है। पार्टी पहले भी कई राज्यों में नए और अप्रत्याशित नेताओं को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका चुकी है। बिहार में अभी विधानसभा चुनाव में लंबा समय बाकी है, इसलिए पार्टी किसी नए चेहरे पर प्रयोग करने से भी नहीं हिचक सकती।
