बिहार की सियासत हमेशा से ही पूरे देश के लिए आकर्षण का केंद्र रही है। यहां की राजनीति जाति, समाज, युवा और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर टिकी रहती है। इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा जिस जोड़ी की हो रही है, वो है राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की। बिहार की जनता इन दोनों नेताओं को लेकर उम्मीदें क्यों पाल रही है और इनके साथ क्यों खड़ी होती दिख रही है, इसके पीछे कई वजहें हैं।

1. युवाओं का प्रतिनिधित्व

बिहार देश का सबसे युवा राज्य कहा जाता है। बड़ी आबादी 35 साल से कम उम्र की है। तेजस्वी यादव खुद युवा हैं और बेरोज़गारी के सवाल को खुलकर उठाते हैं। वहीं राहुल गांधी भी युवाओं से जुड़ने के लिए सीधे संवाद करते हैं। नौकरी, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दे दोनों नेताओं की प्राथमिकता में दिखते हैं। यही वजह है कि युवा वर्ग इनकी ओर उम्मीद से देख रहा है।

2. गरीब और आम जनता की आवाज़

बिहार की बड़ी आबादी आज भी गरीबी और पलायन की मार झेल रही है। यहां के लोग रोज़गार के लिए पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत तक जाते हैं। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव लगातार यह सवाल उठाते हैं कि बिहार को उसके हक का हिस्सा क्यों नहीं मिल रहा? “बिहारी मजदूर है, मजबूर नहीं” जैसी भावनात्मक बात जनता को अपने दिल के करीब लगती है।

3. जात-पात से ऊपर उठकर राजनीति की कोशिश

बिहार की राजनीति लंबे समय से जातियों में बंटी रही है। लेकिन राहुल गांधी और तेजस्वी यादव दोनों ही सामाजिक न्याय और बराबरी की बात करते हैं। तेजस्वी यादव कहते हैं कि “सबको साथ लेकर चलना है” और राहुल गांधी कहते हैं कि “देश बिना भाईचारे के नहीं चल सकता”। इस संदेश को जनता जात-पात की दीवार से ऊपर उठकर देखने लगी है।

बिहार
नेता प्रतिपक्ष लोकसभा राहुल गांधी और नेता प्रतिपक्ष बिहार विधानसभा तेजस्वी यादव

4. वर्तमान सरकार से नाराज़गी

बिहार की जनता 20 साल से “डबल इंजन सरकार” का वादा सुन रही है, लेकिन नतीजे आज भी निराशाजनक हैं।

शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है।

नौकरियों की कमी है।

स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर है।

हर साल बाढ़ और पलायन की समस्या जस की तस है।

लोगों को लगने लगा है कि मौजूदा सरकार ने उम्मीदें तो जगाईं लेकिन धरातल पर नतीजे नहीं दिए। ऐसे में राहुल और तेजस्वी एक विकल्प के रूप में सामने आ रहे हैं।

5. भावनात्मक जुड़ाव

राहुल गांधी ने अपनी “भारत जोड़ो यात्रा” और “वोटर अधिकार यात्रा” से यह संदेश दिया कि वो लोगों से जुड़ने और उनकी पीड़ा सुनने आए हैं। वहीं तेजस्वी यादव ने विपक्ष के नेता के तौर पर लगातार बेरोज़गार युवाओं, किसानों और मजदूरों की आवाज़ उठाई। इन दोनों नेताओं का यह भावनात्मक जुड़ाव जनता के मन में भरोसा पैदा कर रहा है कि शायद यही हमारी आवाज़ बन सकते हैं।

बिहार की जनता अब बदलाव चाहती है

बिहार की जनता अब बदलाव चाहती है। थकी हुई व्यवस्था, बेरोज़गारी, पलायन और गरीबी के बीच लोगों को राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की जोड़ी एक नई उम्मीद दिखा रही है। जहां राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी को चुनौती देते हैं, वहीं तेजस्वी यादव बिहार की धरती पर युवाओं और गरीबों की आवाज़ उठाते हैं। यही कारण है कि यह जोड़ी धीरे-धीरे बिहार की जनता के दिलों में उतरती जा रही है।

यह जोड़ी केवल राजनीति की जोड़-घटाव नहीं, बल्कि उम्मीद और बदलाव की राजनीति का चेहरा बनती दिख रही है।

बिहार
वोटर अधिकार यात्रा में जनता का जन सैलाब

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