केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। इन विधेयकों का उद्देश्य यह है कि अगर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या केंद्र शासित प्रदेश के मंत्री को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है तो उन्हें उनके पद से हटाया जा सके। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा कानूनों में ऐसा कोई भी स्पष्ट प्रावधान नहीं है जिससे गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत की स्थिति में ऐसे नेताओं को उनके पद से हटाया जा सके। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने ये तीन विधेयक तैयार किए हैं।

आप को बता दें कि बुधवार को केंद्र सरकार जिन विधेयकों को पेश करने वाली हैं, उनमें केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक, 2025, संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 भी शामिल है। हालांकि कांग्रेस ने इन विधेयकों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी सरकार विपक्ष को अस्थिर करने के लिए ही ये नया कानून ला रही है।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

वहीं कांग्रेस ने इन विधेयकों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार इन विधेयकों के जरिए विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों को निशाना बनाना चाहती है। कांग्रेस प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि भाजपा विपक्ष को कमजोर करने के लिए कानून का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार की योजना है कि केंद्र की एजेंसियों से विपक्षी नेताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार कराया जाए और फिर नए कानून के तहत उन्हें तुरंत ही पद से हटा दिया जाए।

‘दोषी साबित होने से पहले ही हटाया जाएगा पद से’

सिंघवी ने कहा कि यह कैसी राजनीति है जिसमें बिना किसी ठोस आधार के गिरफ्तारी की जाती है और गिरफ्तारी होते ही मुख्यमंत्री को पद से हटाया जाता है?” उन्होंने इसे गैरकानूनी, असंवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ बताया। उन्होंने आगे कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी का कोई मुख्यमंत्री इस कानून के दायरे में नहीं आएगा, लेकिन विपक्षी मुख्यमंत्रियों को निशाना बनाया जाएगा। यह साफ तौर पर सत्ता का दुरुपयोग है।

केंद्र
कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी

अनुच्छेद 75 (केंद्र सरकार – प्रधानमंत्री और मंत्रीमंडल)

इस विधेयक के तहत यदि कोई भी मंत्री लगातार 30 दिन तक गंभीर अपराध (5 वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराध) के आरोप में जेल में है, तो राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर उसे पद से हटा देंगे। यदि प्रधानमंत्री सलाह नहीं देते तो 31वें दिन के बाद वह मंत्री अपने आप पद से हटा हुआ माना जाएगा। यदि प्रधानमंत्री स्वयं 30 दिन तक ऐसे आरोप में जेल में हैं, तो उन्हें 31वें दिन तक इस्तीफा देना होगा। यदि इस्तीफा नहीं दिया, तो उनका पद स्वतः समाप्त हो जाएगा।

अनुच्छेद 164 (राज्य सरकार – मुख्यमंत्री और मंत्रीमंडल)

इस विधेयक के तहत यदि कोई राज्य मंत्री 30 दिन तक जेल में है, तो राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर उसे पद से हटा देंगे। यदि सलाह नहीं दी जाती, तो 31वें दिन से मंत्री का पद अपने आप ही समाप्त हो जाएगा। यदि मुख्यमंत्री स्वयं 30 दिन तक जेल में रहते हैं, तो उन्हें 31वें दिन तक इस्तीफा देना ही होगा, अन्यथा उनका पद स्वतः समाप्त हो जाएगा।

अनुच्छेद 239AA (दिल्ली सरकार – मुख्यमंत्री और मंत्रीमंडल)

यही नियम दिल्ली की विधान सभा और मंत्रिपरिषद पर भी लागू होगा। यदि दिल्ली का मंत्री 30 दिन तक जेल में है, तो राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री की सलाह पर उसे पद से उसी समय हटा देंगे। यदि मुख्यमंत्री 30 दिन तक जेल में रहता है, तो 31वें दिन तक उसे इस्तीफा देना होगा, वरना उसका पद स्वतः समाप्त हो जाएगा।

समिति के पास भेजे जाएंगे तीनों विधेयक

गौरतलब यह है कि गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में एक प्रस्ताव भी पेश करेंगे, जिसके जरिए इन तीनों विधेयकों को संसद की एक संयुक्त समिति के पास भेजा जाएगा ताकि इन पर विस्तृत विचार-विमर्श भी हो सके। इसको लेकर सरकार का कहना है कि इन विधेयकों के जरिए राजनीति को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और नैतिक बनाया जा सकेगा। इससे आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे किसी भी जनप्रतिनिधि को सत्ता से हटाना आसान हो जाएगा और लोकतंत्र की गरिमा बनी रहेगी।

देश दुनिया की खबरों की अपडेट के लिए AVN News पर बने रहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *