Hindi Diwas 2024: हिंदी दिवस हर साल की तरह 14 सितंबर को मनाया जा रहा है। यह दिन इसलिए खास है क्योंकि 14 सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में अपनाया था। तब से हर साल इसी दिन हिंदी भाषा के महत्व और उसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए हिंदी दिवस मनाया जाता है।
हिंदी दिवस के रोचक तथ्य
राजभाषा का दर्जा: 1949 में जब संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया, तब इसके साथ देवनागरी लिपि को भी अपनाया गया।
दुनिया में तीसरी सबसे बोली जाने वाली भाषा: हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है, अंग्रेजी और चीनी के बाद।
कई देशों में बोली जाती है: सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि नेपाल, मॉरीशस, फिजी, गुयाना, सूरीनाम, और ट्रिनिडाड जैसे देशों में भी हिंदी बोली जाती है।
सरकारी कामकाज में हिंदी: हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य सरकारी और अन्य कामकाज में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना है, ताकि यह भाषा प्रशासन और जनजीवन में ज्यादा प्रभावी हो सके।
राष्ट्रभाषा और राजभाषा में अंतर: हिंदी भारत की राजभाषा है, न कि राष्ट्रभाषा। संविधान में कोई राष्ट्रभाषा घोषित नहीं की गई है।
इस दिन स्कूल, कॉलेज, और सरकारी कार्यालयों में हिंदी से जुड़े प्रतियोगिताएं, सेमिनार, और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि लोगों में हिंदी के प्रति प्रेम और सम्मान बढ़े।
हिंदी साहित्य में कई महान लेखकों और लेखिकाओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहां पांच प्रसिद्ध हिंदी लेखिकाओं और लेखकों के नाम जिन्होंने समाज को बदलने और समाज में एक अहम योगदान दिया :
हिंदी की प्रसिद्ध लेखिकाएं:
1. महादेवी वर्मा
महादेवी वर्मा को हिंदी साहित्य की छायावादी युग की प्रमुख कवियत्री माना जाता है। उनकी रचनाओं में संवेदनशीलता और आध्यात्मिकता का सुंदर मिश्रण है। प्रमुख रचनाएं: यामा, नीरजा, सप्तपर्णा।
2. सुभद्रा कुमारी चौहान
सुभद्रा कुमारी चौहान ने वीर रस की कविताओं के साथ-साथ सामाजिक विषयों पर भी लिखा। उनकी प्रसिद्ध कविता “झाँसी की रानी” विशेष रूप से प्रचलित है।

3. मन्नू भंडारी
मन्नू भंडारी हिंदी साहित्य की प्रख्यात उपन्यासकार हैं। उन्होंने सामाजिक और पारिवारिक जीवन की जटिलताओं को सरल भाषा में प्रस्तुत किया। प्रमुख रचनाएं: आपका बंटी, महाभोज।
4. कृष्णा सोबती
कृष्णा सोबती का लेखन स्त्री जीवन और सामाजिक मुद्दों पर आधारित है। उन्होंने अपने लेखन में समाज के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। प्रमुख रचनाएं: ज़िंदगीनामा, सूरजमुखी अंधेरे के।
5. मैत्रेयी पुष्पा
मैत्रेयी पुष्पा का लेखन ग्रामीण जीवन और स्त्री अधिकारों पर आधारित है। उनकी कहानियां और उपन्यास आम जनजीवन के संघर्षों को उजागर करते हैं। प्रमुख रचनाएं: इदन्नमम, चाक।
हिंदी के प्रसिद्ध लेखक:
प्रेमचंद हिंदी साहित्य के महानतम उपन्यासकार और कहानीकारों में से एक हैं। उनकी कहानियों और उपन्यासों में समाज की वास्तविक तस्वीरें उकेरी गई हैं। प्रमुख रचनाएं: गोदान, गबन, ईदगाह।

2. हरिवंश राय बच्चन
हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य में छायावादी काव्यधारा के प्रमुख कवियों में से एक हैं। उनकी आत्मकथात्मक रचनाएं और कविताएं बहुत प्रसिद्ध हैं। प्रमुख रचनाएं: मधुशाला, नीड़ का निर्माण फिर।

3. रामधारी सिंह ‘दिनकर’
दिनकर को वीर रस के महान कवियों में गिना जाता है। उनकी कविताओं में राष्ट्रवाद और सामाजिक चेतना का प्रबल प्रभाव दिखता है। प्रमुख रचनाएं: रश्मिरथी, परशुराम की प्रतीक्षा।
4. जयशंकर प्रसाद
जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि, नाटककार और उपन्यासकार थे। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, इतिहास और प्रेम की गहरी झलक मिलती है। प्रमुख रचनाएं: कामायनी, आंसू।
5. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
निराला हिंदी साहित्य में छायावाद के महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते हैं। उनकी रचनाओं में मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं का चित्रण देखने को मिलता है। प्रमुख रचनाएं: सरोज स्मृति, अनामिका।
ये लेखिकाएं और लेखक हिंदी साहित्य के उन स्तंभों में से हैं जिन्होंने अपनी अद्भुत रचनाओं से हिंदी भाषा को समृद्ध किया है।
