जन्माष्टमी पर खीरा क्यों काटते हैं?

जन्माष्टमी पर खीरा क्यों काटते हैं?

जन्माष्टमी पर खीरा काटना भगवान कृष्ण के जन्म का प्रतीक है। आधी रात को, जब भगवान कृष्ण का जन्म होता है, तब खीरा काटकर, उसके बीज निकालकर, उसे नाभि छेदन (नाल काटना) की प्रतीकात्मक क्रिया के रूप में मनाया जाता है, खीरे का डंठल गर्भनाल का प्रतीक माना जाता है, और इसे काटकर, भगवान कृष्ण को माता देवकी के गर्भ से अलग करने की रस्म निभाई जाती है, 

इस रस्म के पीछे मान्यता है कि जिस प्रकार जन्म के समय बच्चे को मां से अलग करने के लिए गर्भनाल को काटा जाता है, उसी प्रकार खीरे को काटकर भगवान कृष्ण का जन्म मनाया जाता है,  

यह भी माना जाता है कि खीरा शुद्ध और पवित्र फल है, और इसे कृष्ण जी को अर्पित किया जाता है, 

इसके अतिरिक्त, कुछ लोग खीरे को गर्भवती महिलाओं के लिए शुभ मानते हैं, और इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है.

जन्माष्टमी पर खीरा क्यों काटते हैं?

खीरा काटने की परंपरा का पौराणिक महत्व:

  1. जन्म के प्रतीक रूप में:

    • खीरे को गर्भ का प्रतीक माना जाता है।

    • भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रात्रि के 12 बजे हुआ था। खीरे को उस समय काटा जाता है, जैसे कि एक गर्भ से बालक का जन्म हो रहा हो।

    • खीरे को बीच से चीरकर उसमें से छोटा-सा बाल गोपाल (कृष्ण की मूर्ति) निकाली जाती है, जो उनके जन्म का प्रतीक होता है।

  2. देवकी-वसुदेव के कारावास का संकेत:

    • खीरे को काटकर उसका बीज निकालना यह दर्शाता है कि भगवान कृष्ण का कारागार से बाहर आना, यानी बंदीगृह से जन्म लेकर संसार में आना।

  3. सांकेतिक शुद्धता और शांति:

    • खीरा ठंडा और शांत फल होता है। यह शांति, पवित्रता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

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खीरा काटने की प्रक्रिया कैसे होती है?

  • रात्रि 12 बजे आरती के बाद खीरे को बीच से चीरकर उसके अंदर से बाल कृष्ण की मूर्ति निकाली जाती है।

  • यह भगवान के जन्म का प्रतीकात्मक चित्रण होता है, जो बहुत श्रद्धा और प्रेम से किया जाता है।

क्या यह हर जगह होता है?

  • यह परंपरा विशेष रूप से उत्तर भारत, खासकर ब्रज क्षेत्र (मथुरा-वृंदावन) में प्रचलित है।

  • अन्य क्षेत्रों में जन्माष्टमी की पूजा भिन्न तरीकों से होती है।

“आप सभी देहवासियों को ‘एवीएन परिवार’ की ओर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
जय श्रीकृष्ण!”

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Note:

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By: KP
Edited  by: KP

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