Ganesh Chaturthi : गणेश चतुर्थी भारत के सबसे भव्य और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। दस दिनों तक बप्पा का आगमन घर-घर और पंडालों में धूमधाम से होता है। ढोल-ताशों की गूंज, मोदक की मिठास और भक्तों की श्रद्धा से यह पर्व विशेष बनता है। लेकिन इस उत्सव से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य हैं, जो शायद आपको अब तक नहीं पता होंगे।
गणेश चतुर्थी
1. शिवाजी महाराज के दौर से शुरुआत
ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि गणेश चतुर्थी का पहला बड़ा उत्सव छत्रपति शिवाजी महाराज के समय पुणे में मनाया गया। वे गणेश जी को कुलदेवता मानते थे। बाद में पेशवाओं ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाया और महाराष्ट्र में इसका महत्व और बढ़ गया।
2. तिलक ने दिया जनआंदोलन का रूप
1893 में स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने गणेश चतुर्थी को निजी घरों से बाहर निकालकर सार्वजनिक उत्सव बना दिया। उस समय अंग्रेज़ बड़ी सभाओं पर रोक लगाते थे। तिलक ने धार्मिक बहाने से इस पर्व को जनआंदोलन का रूप दिया और सभी जाति-समुदाय के लोग एकजुट हुए।
3. लालबागचा राजा का भव्य विसर्जन
मुंबई का “लालबागचा राजा” गणपति पंडाल पूरे देश में प्रसिद्ध है। इसे पहली बार 1935 में स्थापित किया गया था। यहां का विसर्जन जुलूस भारत का सबसे लंबा माना जाता है, जो सुबह 10 बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह तक चलता है। लाखों भक्त इस दृश्य के साक्षी बनते हैं।
4. विदेशों में गणपति की पूजा
भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल, थाईलैंड, जापान, कंबोडिया और अफगानिस्तान में भी गणेश पूजा होती है। अलग-अलग देशों में गणपति की मूर्तियों और स्वरूपों में भिन्नता देखने को मिलती है। इंडोनेशिया की 20,000 रुपैया मुद्रा पर भी गणेश जी की छवि अंकित है।
5. चाँद देखने की मनाही
मान्यता है कि भाद्रपद चतुर्थी की रात चाँद देखने से अवशुगन होता है। कथा के अनुसार एक बार चंद्रमा ने गणेश जी का उपहास किया था। इस पर क्रोधित होकर गणेश जी ने उन्हें कठोर श्राप दिया कि इस दिन चाँद देखने वाला मिथ्या दोष (झूठे आरोप) का शिकार होगा।