बांस की खेती

बांस की खेती से किसान होंगे मालामाल, सरकार देती है 50% तक सब्सिडी—जानिए आवेदन का तरीका..

ध्यान दें: सरकारी योजनाएँ समय-समय पर बदल सकती हैं। नवीनतम आँकड़ों या आवेदन लिंक को जानने के लिए किसान अपना नज़दीकी कृषि विभाग/कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क अवश्य करें।

Business Idea: भारत में बांस को “ग्रीन गोल्ड” कहा जाता है। तेज़ी से बढ़ने वाली यह बहुउपयोगी फसल कम लागत, कम मेहनत और अधिक मुनाफा देने के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। फर्नीचर, पेपर इंडस्ट्री, अगरबत्ती, बायोफ्यूल, घर निर्माण, हैंडीक्राफ्ट और सजावटी सामान जैसी दर्जनों उद्योगों में बांस की भारी मांग है। इसी कारण सरकार भी किसानों को बांस की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है और कई क्षेत्रों में “50% तक की सब्सिडी” उपलब्ध कराई जा रही है।

बांस की खेती

बांस की खेती क्यों है फायदेमंद?

  1. कम लागत और कम मेहनत
  • बांस एक बार लगाने पर 40–50 साल तक उपज देता है।
  • इसे अधिक खाद-पानी की आवश्यकता नहीं होती।
  • रोग व कीट का प्रकोप कम होता है।
  1. तेज़ी से बढ़ने वाली फसल
  • कुछ किस्में 3–4 साल में व्यावसायिक कटाई योग्य हो जाती हैं।
  • एक पौधा साल-दर-साल नए शूट पैदा करता है।
  1. बाजार में भारी मांग
  •  बांस की मांग फर्नीचर, पेपर, अगरबत्ती, हथकरघा, निर्माण और सजावटी वस्तुओं में लगातार बढ़ रही है।
  •  बड़े उद्योगों के अलावा स्थानीय स्तर पर भी इसकी अच्छी बिक्री होती है।
  1. सरकारी योजनाओं का लाभ
  •  कई राज्यों में बांस कृषि फसल की श्रेणी में आता है, जिससे किसान भूमि कानूनों की जटिलताओं से मुक्त रहते हैं।
  •  सरकार विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पौध, ड्रिप सिंचाई, खेत विकास और प्रसंस्करण इकाइयों पर सब्सिडी देती है।

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सरकार कितना देती है सब्सिडी?

भारत सरकार एवं राज्य सरकारें राष्ट्रीय बाँस मिशन (National Bamboo Mission – NBM) और अन्य कृषि योजनाओं के माध्यम से अलग-अलग मदों पर सहायता देती हैं।

सामान्यतः किसानों को—

  • पौध खरीद पर 40–50% सब्सिडी
  • ड्रिप इरिगेशन सिस्टम पर 50–60% सब्सिडी
  • प्रोसेसिंग यूनिट/हस्तशिल्प इकाई पर 35–50% तक सहायता
  • प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता मुफ्त

(नोट: यह प्रतिशत राज्य और योजना के अनुसार बदलता रहता है। आवेदन करते समय अपने जिले के कृषि विभाग से नवीनतम जानकारी अवश्य प्राप्त करें।)

बांस की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी

जलवायु

  •  उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छा उत्पादन।
  •  20°C से 35°C तापमान अनुकूल।

मिट्टी

दोमट, लाल एवं बलुई मिट्टी उपयुक्त।

जल निकासी वाली भूमि बेहतर।

 सिंचाई

  • आरंभिक वर्ष में हफ्ते में 1–2 सिंचाई पर्याप्त।
  • बाद में बारिश आधारित खेती भी सफल रहती है।

निवेश व कमाई (आम अनुमान)

| मद                 | अनुमानित लागत (प्रति एकड़) |

| —————— | ————————– |

| पौध रोपण           | ₹10,000 – ₹20,000       |

| देखभाल (पहला वर्ष) | ₹8,000 – ₹12,000    |

| कुल लागत           | ₹20,000 – ₹30,000       |

संभावित कमाई

  •  3–4 साल बाद प्रति एकड़ 10–15 टन बांस की पैदावार।
  •  बाजार मूल्य ₹10–25 प्रति किलो (गुणवत्ता पर निर्भर)।
  •  1–3 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक आय संभव।

सरकारी सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें?

  1. निकटतम कृषि विभाग/कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) जाएँ
  • यहाँ आपको बांस की खेती और सब्सिडी योजनाओं की नवीनतम जानकारी मिलेगी।
  • आवेदन फॉर्म वहीं उपलब्ध होता है।
  1. आवश्यक दस्तावेज़ तैयार रखें
  • आधार कार्ड
  • भूमि दस्तावेज (खसरा-खतौनी)
  • बैंक खाता
  • मोबाइल नंबर
  • खेत का नक्शा या भू-मानचित्र
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  1. ऑनलाइन आवेदन (यदि राज्य में उपलब्ध हो)

कई राज्य पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया उपलब्ध होती है, जैसे:

  •  राज्य कृषि विभाग की वेबसाइट
  • राष्ट्रीय कृषि पोर्टल
  • सीएससी केंद्रों पर भी कई राज्यों की योजनाओं के आवेदन किए जाते हैं।
  1. कृषि अधिकारी द्वारा सत्यापन
  • विभाग का अधिकारी आपके खेत का निरीक्षण करता है।
  • आपकी पात्रता के आधार पर सब्सिडी स्वीकृत की जाती है।
  1. सब्सिडी का भुगतान
  • सब्सिडी सीधे किसान के बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेजी जाती है।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

  • केवल प्रमाणित नर्सरी से गुणवत्तापूर्ण पौधे खरीदें।
  • पौधों के बीच 5×5 या 6×6 मीटर की दूरी रखें।
  • खरपतवार नियंत्रण और समय पर सिंचाई से उत्पादकता बढ़ती है।
  • यदि व्यावसायिक खेती कर रहे हैं तो उद्योगों से पहले से अनुबंध कर लें।
  • सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लें।

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निष्कर्ष

बांस की खेती किसानों के लिए एक ऐसा विकल्प बनकर उभरी है, जिसमें “कम लागत और अधिक मुनाफे” की अपार संभावनाएँ हैं। सरकार की ओर से मिलने वाली “50% तक की सब्सिडी” के साथ यह खेती और भी लाभदायक बन जाती है। सही मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण पौधे और उचित देखभाल के साथ किसान “लंबे समय तक स्थायी आय” प्राप्त कर सकते हैं।

Note:

Disclaimer: यह आर्टिकल व लेख केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है। यह जानकारी सोर्स पर आधारित है, यह आर्टिकल व प्रकाशक किसी भी त्रुटि या चूक के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।

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By : KP

Edited  by : KP

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