भारत में 2014 से केंद्र की सत्ता पर बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) काबिज़ है। नरेंद्र मोदी लगातार दो बार प्रधानमंत्री बन चुके हैं और अब तीसरे कार्यकाल की शुरुआत हो चुकी है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि जब भी देश में किसी समस्या की बात होती है — बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा या स्वास्थ्य — तो बीजेपी और उसके नेता बार-बार पंडित नेहरू और कांग्रेस को कोसते हैं। सवाल उठता है कि 11 साल सत्ता में रहकर भी अगर आप जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं, तो फिर आपकी सत्ता का क्या मतलब?

1. देश की आर्थिक हालत: आंकड़ों की जुबानी

2014 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट थी 7.41%, जो 2020 में गिरकर -6.6% तक गई (कोविड का असर माना जा सकता है)।

2024 में बेरोजगारी दर 7.8% तक पहुंच चुकी है (CMIE रिपोर्ट)।

युवाओं के बीच बेरोजगारी दर 23.2% है, यानी हर 4 में 1 युवा बेरोजगार।

भारत में बेरोजगारी: डिग्री है, नौकरी नहीं

2014 में कहा गया था — हर साल 2 करोड़ नौकरियां देंगे। लेकिन आज 2025 में CMIE (Centre for Monitoring Indian Economy) के आंकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारी दर 8% से ऊपर है।
युवा रोज़ सुबह उठकर मोबाइल पर जॉब पोर्टल खोलते हैं, लाखों फॉर्म भरते हैं, पर न परीक्षा होती है, न नियुक्ति। बिहार, यूपी, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पढ़ा-लिखा बेरोजगार अब आम शब्द हो गया है।

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फोटो सोर्स दैनिक भास्कर

GDP बढ़ी, पर आम आदमी की ज़िंदगी नहीं
सरकार GDP के आंकड़े दिखाती है, डिजिटल इंडिया की बात करती है, विदेशी निवेश और मेट्रो शहरों में इन्फ्रास्ट्रक्चर की तारीफ होती है, लेकिन गाँव-कस्बे में आज भी लोग पेट पालने को मजबूर हैं।

Amartya Sen ने कहा था —

असली विकास वो है जो आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाए।

कुछ कड़वी सच्चाइयाँ:

SSC, RRB, UPTET, CTET जैसी परीक्षाओं की नियुक्तियाँ सालों तक अटकी रहीं।

पेपर लीक की घटनाएँ आम हो गई हैं।

मनरेगा जैसी योजनाओं में भी काम घट गया है।

क्या सिर्फ योजनाओं की घोषणा कर देना काफी है? क्या जमीनी रोजगार का कोई मतलब नहीं?

क्या कांग्रेस या नेहरू 2024 में आकर नौकरियों पर रोक लगा रहे हैं?

2. महंगाई पर नियंत्रण किसकी जिम्मेदारी?

2014 में पेट्रोल था ₹71 प्रति लीटर, आज कई राज्यों में ₹100 से ऊपर।

सब्जियां, दूध, गैस सिलेंडर, दवाएं — हर चीज़ महंगी हुई है।

महंगाई: रसोई से लेकर राशन तक आग
आज एक आम परिवार की रसोई पूछ रही है — “अच्छे दिन” आए या फिर कीमतों का सैलाब?”

LPG सिलेंडर 2014 में ₹410 था, आज ₹1100 के पार।

टमाटर ₹120 किलो, दूध ₹60 लीटर और सरसों का तेल ₹150 लीटर से ऊपर।

पेट्रोल ₹105 और डीजल ₹93 प्रति लीटर (दिल्ली औसत)।

खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई दर (Retail Food Inflation) 2024 में औसतन 8% के ऊपर रही।

क्या आज की महंगाई की वजह भी 1950 की नीतियां हैं?

2014 में कहा गया था:

“बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार।”

लेकिन 11 साल बाद भी आम आदमी की जेब ढीली होती जा रही है, पेट्रोल पंप पर गाड़ी भरवाना अब भी टेंशन देता है।

एक किसान कहता है –

प्रधानमंत्री साहब टीवी पर बोलते बहुत अच्छा हैं, लेकिन हमारे खेत में लागत बढ़ गई, मुनाफा घट गया।

एक बेरोजगार युवा कहता है –

मोदी जी दुनिया घूम रहे हैं, पर हम अपने गाँव में ही फंसे हैं।

एक गृहिणी कहती है –

राशन लेने जाओ तो हर महीने रेट बढ़ जाता है, कैसे चलाएँ घर?

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3. शिक्षा और स्वास्थ्य की दुर्दशा

भारत की शिक्षा नीति में बार-बार बदलाव हो रहे हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों की हालत ज्यों की त्यों है।

ग्रामीण भारत में एक डॉक्टर पर 10,000 से ज़्यादा मरीज हैं (WHO मानक: 1 डॉक्टर पर 1000)।

मोदी सरकार की आयुष्मान भारत योजना कागज़ पर भले सफल दिखे, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है — कई राज्यों में इसके तहत अस्पतालों को पैसे नहीं मिले और भ्रष्टाचार खूब है।

नेहरू जी के नाम पर स्कीमें नहीं चलतीं, ज़मीनी काम चलता है।

4. तकनीकी विकास और आत्मनिर्भर भारत का भ्रम

‘मेक इन इंडिया’ का सपना दिखाया गया, लेकिन भारत में अब भी चीन से ₹7.5 लाख करोड़ का माल हर साल आता है।

देश में हर मोबाइल से लेकर पंखे तक पर “Made in China” क्यों लिखा है?

क्या चीन से आयात के लिए भी नेहरू दोषी हैं?

5. लोकतंत्र की जिम्मेदारी सत्ता की होती है

एक स्वस्थ लोकतंत्र में सत्ता पक्ष जवाबदेह होता है, न कि विपक्ष या उसके पूर्व नेता।

अगर कोई पार्टी 11 साल तक सत्ता में रही है और अब भी जनता से कहे कि हमारे हाथ बंधे हैं, नेहरू ने ऐसा किया था, तो यह जिम्मेदारी से भागना है।

देशभक्ति का मतलब सिर्फ तालियाँ नहीं

हम सब अपने देश से प्यार करते हैं, और अच्छे नेता को सराहना भी चाहिए, लेकिन अगर कोई सत्ता में 11 साल है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

हर बार कांग्रेस या नेहरू को दोष देना, या “पिछली सरकार” की बात करना अब तर्क नहीं बचा।

नेहरू जी का योगदान भारत की आज़ादी के बाद राष्ट्र निर्माण में रहा, लेकिन अब 2025 में हम हैं। अगर अब भी बीजेपी यह कहे कि देश की खराब स्थिति के लिए 60 साल पुरानी कांग्रेस जिम्मेदार है, तो यह हास्यास्पद है। अब सवाल कांग्रेस से नहीं, बीजेपी से होना चाहिए — आपने 11 साल में क्या किया?
अगर जवाब सिर्फ कांग्रेस ने किया है, तो इसका मतलब साफ है — न इरादा है, न तैयारी, बस बहाना है।

आखिर में सवाल जनता से:

क्या आप 2025 में भी 1950 की बातों से संतुष्ट रहेंगे, या आज की हकीकत को समझकर सवाल पूछेंगे?

सवाल करना देशद्रोह नहीं, देशभक्ति है

अगर नरेंद्र मोदी जी सबसे सफल और यशस्वी प्रधानमंत्री हैं, तो फिर देश में:

हर तीसरा युवा बेरोजगार क्यों है?

रसोई गैस आम माँ के आँसू क्यों निकाल रही है?

किसान आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?

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